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धर्मशाला में सब्सिडी का खेल! फर्जी बिलों से लाखों रुपये लेने के आरोप की विजिलेंस जांच तेज

फर्जी बिलों से 36.42 लाख रुपये की सब्सिडी लेने का आरोप
पिता-बेटे समेत तीन लोगों पर धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज का केस
विजिलेंस ने मांगे विभागीय रिकॉर्ड, कई बिलों में मिली बड़ी गड़बड़ियां


धर्मशाला। बागवानी विभाग की योजनाओं में फर्जी बिल और दस्तावेज लगाकर लाखों रुपये की सरकारी सब्सिडी लेने के आरोपों की जांच अब तेज हो गई है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो ने मामले में संबंधित विभाग से जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगे हैं। इसके साथ ही उन लोगों और फर्मों से जुड़े भुगतान की भी जांच की जा रही है, जिनके नाम पर काम और बिल दिखाए गए हैं।

मामला कांगड़ा जिले के जवाली उपमंडल से जुड़ा है। विजिलेंस ने इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें पिता-बेटे समेत एक अन्य व्यक्ति शामिल है। तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, उनका इस्तेमाल करने और सबूत मिटाने से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

93.48 लाख रुपये का खर्च दिखाकर ली 36.42 लाख की सब्सिडी

विजिलेंस की शुरुआती जांच में सबसे बड़ा मामला टिशू कल्चर यूनिट से जुड़ा सामने आया है। जांच के अनुसार वर्ष 2020 में यूनिट स्थापित करने पर करीब 93.48 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया गया था। इसी आधार पर करीब 36.42 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी हासिल की गई।

बाद में शिकायत की जांच शुरू हुई तो कई बिल और दस्तावेज जांच के घेरे में आ गए। विजिलेंस को कुछ बिलों में ऐसी गड़बड़ियां मिलीं, जिनसे उनकी असलियत पर सवाल खड़े हुए हैं।

अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि यूनिट लगाने में वास्तव में कितना पैसा खर्च हुआ था और विभाग को दिए गए बिलों में कितनी रकम सही थी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि सब्सिडी जारी करने से पहले विभाग ने दस्तावेजों और काम की ठीक से जांच की थी या नहीं।

बिल में जिस व्यक्ति का नाम, पंचायत रिकॉर्ड में उसका पता नहीं

मामले में एक ऐसा बिल भी सामने आया है, जिसने जांच को और गंभीर बना दिया। बिल एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर था, जिसका पंचायत रिकॉर्ड में कोई अस्तित्व नहीं मिला।

विजिलेंस अब यह पता लगा रही है कि उस व्यक्ति के नाम पर बिल किसने बनाया और सरकारी रिकॉर्ड में वह बिल कैसे शामिल हो गया। इस बिंदु को जांच में अहम माना जा रहा है।

असली बिल से कई गुना ज्यादा रकम दिखाई गई

जांच के दौरान एक अन्य फर्म से जुड़ा बिल भी सामने आया। फर्म के वास्तविक बिल में जितनी रकम थी, सरकारी रिकॉर्ड में उससे कई गुना ज्यादा राशि दिखाई गई।

विजिलेंस अब दोनों रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। जांच में यह देखा जा रहा है कि बिल की रकम बढ़ाकर सरकारी सब्सिडी लेने की कोशिश तो नहीं की गई।

ठेकेदार ने कहा- मेरे नाम से ऐसा कोई काम नहीं हुआ

मामले में एक ठेकेदार का नाम भी रिकॉर्ड में सामने आया। उसके नाम पर लाखों रुपये के काम और बिल दिखाए गए थे। लेकिन जांच के दौरान ठेकेदार ने कथित तौर पर अपने नाम पर दिखाए गए इन कामों और बिल जारी करने से इनकार कर दिया।

इसके बाद विजिलेंस ने संबंधित दस्तावेजों और भुगतान रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि ठेकेदार के नाम पर दिखाए गए काम वास्तव में हुए थे या सिर्फ कागजों में दर्ज किए गए।

पिता के नाम पर 20.30 लाख रुपये की सब्सिडी भी जांच में

जांच सिर्फ टिशू कल्चर यूनिट तक सीमित नहीं है। आरोपी के पिता के नाम पर मिली सरकारी सब्सिडी भी जांच के दायरे में आ गई है।

रिकॉर्ड के अनुसार उनके नाम पर तीन पॉलीहाउस और एक फल पौधरोपण परियोजना के लिए करीब 20.30 लाख रुपये की सब्सिडी ली गई थी।

विजिलेंस अब इन परियोजनाओं से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। इसमें देखा जा रहा है कि ये परियोजनाएं वास्तव में बनाई गई थीं या नहीं, उन पर कितना पैसा खर्च हुआ और विभाग को दिए गए बिल सही थे या नहीं।

विभाग से मांगे दस्तावेज, भुगतान की भी होगी पड़ताल

मामले की जांच आगे बढ़ाने के लिए विजिलेंस ने संबंधित विभाग से परियोजनाओं की मंजूरी, खर्च का विवरण, बिल-वाउचर, भुगतान रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट सहित अन्य दस्तावेज मांगे हैं।

जांच एजेंसी इन दस्तावेजों को संबंधित लोगों और फर्मों के बयानों के साथ मिलाएगी। इसके बाद यह सामने आ सकता है कि सरकारी सब्सिडी लेने के लिए फर्जी बिल किस तरह इस्तेमाल किए गए और इसमें किस-किस की भूमिका रही।

विजिलेंस यह भी जांच रही है कि विभाग में सब्सिडी जारी करने से पहले कागजों की जांच कैसे हुई। यदि जांच में सरकारी रिकॉर्ड में जानबूझकर गलत जानकारी देने या फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो मामले में आगे कार्रवाई हो सकती है।

फिलहाल जांच जारी है। विजिलेंस की ओर से जुटाए जा रहे दस्तावेज और भुगतान रिकॉर्ड इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए अहम होंगे। आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच पूरी होने और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगी।